जल तत्व वास्तु
शुभ दिशा: उत्तर-पूर्व / उत्तर देव: वरुण जल तत्व
आज का सुझाव:
रसोई में मसाले उत्तर-पूर्व में और गैस चूल्हा दक्षिण-पूर्व में रखें।
अवधारणा
जल जीवन का आधार है और वास्तु में इसका अत्यंत महत्व है। उत्तर और उत्तर-पूर्व दिशा जल तत्व की प्रमुख दिशाएं हैं। यहाँ जल का प्रवाह, एक्वेरियम, झरना या जल संग्रह रखना समृद्धि और शांति लाता है।
आदर्श व्यवस्था
- एक्वेरियम उत्तर दिशा में रखें।
- घर के उत्तर-पूर्व में भूमिगत जल स्रोत शुभ है।
- इंडोर फव्वारा (indoor fountain) उत्तर में रखें।
- जल का प्रवाह हमेशा उत्तर या पूर्व की ओर होना चाहिए।
- ओवरहेड टंकी दक्षिण-पश्चिम में रखें।
वास्तु दोष
- दक्षिण में जल का प्रवाह हानिकारक है।
- एक्वेरियम में मछलियां मरना अपशकुन है — तुरंत ठीक करें।
- दक्षिण-पूर्व में जल स्रोत अग्नि-जल संघर्ष उत्पन्न करता है।
- लीकेज नल या पाइप तुरंत ठीक करवाएं।
उपाय
- एक्वेरियम में नौ मछलियां (आठ सुनहरी, एक काली) रखें।
- उत्तर-पूर्व में तांबे के कलश में जल रखें।
- घर में रोज उत्तर दिशा में गंगाजल छिड़कें।
- वरुण यंत्र स्थापित करें।
- नीले रंग के मोमबत्ती उत्तर में जलाएं।
दैनिक चेकलिस्ट
- एक्वेरियम साफ करें।
- नल की लीकेज जांचें।
- जल कलश बदलें।
- पानी की टंकी जांचें।
- इनडोर फव्वारा चालू करें।