सीढ़ी वास्तु
शुभ दिशा: दक्षिण / पश्चिम / दक्षिण-पश्चिम देव: शनि पृथ्वी तत्व
आज का सुझाव:
रसोई में मसाले उत्तर-पूर्व में और गैस चूल्हा दक्षिण-पूर्व में रखें।
अवधारणा
सीढ़ियां घर में ऊपर की ओर जाने का मार्ग हैं। वास्तु में सीढ़ियों की स्थिति का सीधा प्रभाव परिवार की उन्नति और स्वास्थ्य पर पड़ता है। दक्षिण, पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम में बनी सीढ़ियां शुभ मानी जाती हैं।
आदर्श व्यवस्था
- सीढ़ियां दक्षिण, पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम में बनाएं।
- सीढ़ियों की संख्या विषम होनी चाहिए (11, 13, 15, 17...)।
- सीढ़ियां दक्षिणावर्त (clockwise) बनाएं।
- सीढ़ियों के नीचे किचन या पूजा घर न बनाएं।
- सीढ़ियों पर पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था करें।
वास्तु दोष
- ईशान (उत्तर-पूर्व) में सीढ़ियां बनाना महादोष है।
- टूटी हुई या असमान सीढ़ियां हानिकारक हैं।
- सीढ़ियों के नीचे मंदिर बनाना वर्जित है।
- घुमावदार सीढ़ियां नकारात्मक ऊर्जा का संचरण करती हैं।
उपाय
- ईशान में सीढ़ियां हों तो वहाँ गणेश जी की मूर्ति रखें।
- सीढ़ियों के नीचे भंडार कक्ष का उपयोग करें।
- सीढ़ियों पर हरे रंग का उपयोग शुभ है।
- सीढ़ियों के दोनों तरफ पीले रंग की दीप रखें।
- सीढ़ी की रेलिंग मजबूत और साफ रखें।
दैनिक चेकलिस्ट
- सीढ़ियां साफ करें।
- प्रकाश व्यवस्था जांचें।
- रेलिंग मजबूती जांचें।
- टूटी टाइल ठीक करवाएं।
- नकारात्मक वस्तुएं हटाएं।