नैऋत्य कोण वास्तु
शुभ दिशा: दक्षिण-पश्चिम देव: नैऋति पृथ्वी तत्व
आज का सुझाव:
रसोई में मसाले उत्तर-पूर्व में और गैस चूल्हा दक्षिण-पूर्व में रखें।
अवधारणा
नैऋत्य कोण स्थिरता, भार और पृथ्वी तत्व का प्रतीक है। यहाँ मुखिया का शयनकक्ष, भारी फर्नीचर और तिजोरी रखना शुभ है। यह कोण घर की नींव जैसा है — मजबूत होने पर पूरे परिवार में स्थिरता आती है।
आदर्श व्यवस्था
- मुखिया का शयनकक्ष दक्षिण-पश्चिम में हो।
- यहाँ भारी और ठोस फर्नीचर रखें।
- तिजोरी या लॉकर यहाँ रखें जो उत्तर की ओर खुले।
- इस कोण में निर्माण ऊँचा होना चाहिए।
- दक्षिण-पश्चिम की दीवार मोटी और मजबूत होनी चाहिए।
वास्तु दोष
- नैऋत्य में खुला कुआं या सेप्टिक टैंक हानिकारक है।
- यहाँ शौचालय बनाना स्वास्थ्य व आर्थिक हानि देता है।
- इस कोण में हल्की और खाली जगह नहीं छोड़नी चाहिए।
- यहाँ पानी का बहाव नहीं होना चाहिए।
उपाय
- नैऋत्य दोष के लिए दक्षिण-पश्चिम में भारी पत्थर रखें।
- यहाँ भूरे या पीले रंग का उपयोग करें।
- दक्षिण दिशा में सात घोड़ों का चित्र लगाएं।
- यहाँ छोटा पिरामिड रखें।
- दक्षिण-पश्चिम की दीवार पर कभी दरवाजा न खोलें।
दैनिक चेकलिस्ट
- तिजोरी/लॉकर व्यवस्थित करें।
- शयनकक्ष साफ रखें।
- भारी सामान ठीक से रखें।
- इस कोने में प्रकाश की व्यवस्था करें।
- नकारात्मक वस्तुएं हटाएं।