अग्नेय कोण वास्तु

शुभ दिशा: दक्षिण-पूर्व देव: अग्नि देव अग्नि तत्व

आज का सुझाव: रसोई में मसाले उत्तर-पूर्व में और गैस चूल्हा दक्षिण-पूर्व में रखें।

अवधारणा

अग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व) अग्नि तत्व का क्षेत्र है। यहाँ अग्नि देव का आधिपत्य है। इस दिशा में रसोई, विद्युत उपकरण और अग्नि स्रोत रखना शुभ है। यह ऊर्जा, जीवन शक्ति और रचनात्मकता का प्रतीक है।

आदर्श व्यवस्था

  • रसोई इस दिशा में बनाएं।
  • विद्युत मीटर, इन्वर्टर यहाँ रखें।
  • यहाँ की दीवारें लाल, नारंगी या गुलाबी रंग से रंगें।
  • यहाँ कंप्यूटर या इलेक्ट्रॉनिक उपकरण रख सकते हैं।
  • शाम को दक्षिण-पूर्व में दीपक अवश्य जलाएं।

वास्तु दोष

  • अग्नेय में पानी का स्रोत — कुआं या टंकी — महादोष है।
  • यहाँ शयनकक्ष बनाने से वैवाहिक कलह होता है।
  • अग्नेय में अंधेरा नहीं होना चाहिए।
  • यहाँ पीले या नीले रंग का अधिक प्रयोग न करें।

उपाय

  • अग्नेय दोष के लिए यहाँ लाल रंग का बल्ब जलाएं।
  • तांबे का त्रिकोण यहाँ रखें।
  • इस कोण में नौ नींबू और हरी मिर्च की माला लटकाएं।
  • यहाँ कपूर जलाएं।
  • अग्नि यंत्र स्थापित करें।

दैनिक चेकलिस्ट

  • रसोई साफ रखें।
  • विद्युत उपकरण जांचें।
  • शाम को दीपक जलाएं।
  • लाल या नारंगी मोमबत्ती जलाएं।
  • इस कोण में पानी न रखें।