पूजा कक्ष वास्तु
शुभ दिशा: उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) देव: शिव / ईश्वर आकाश तत्व
आज का सुझाव:
रसोई में मसाले उत्तर-पूर्व में और गैस चूल्हा दक्षिण-पूर्व में रखें।
अवधारणा
पूजा कक्ष वास्तु में सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थान है। ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में देव शक्ति का वास माना जाता है। यहाँ बनाए गए पूजा कक्ष से घर में दिव्य ऊर्जा का संचार होता है। वास्तु पुरुष का सिर ईशान में होता है जिससे यह स्थान अत्यंत पवित्र और शुभ है।
आदर्श व्यवस्था
- पूजा कक्ष उत्तर-पूर्व कोने में बनाएं।
- देव प्रतिमाओं का मुख पूर्व या पश्चिम की ओर रखें।
- पूजा करते समय पूर्व दिशा में मुख रखें।
- पूजा कक्ष की दीवार सफेद, हल्का पीला या हल्का नीला रखें।
- पूजा कक्ष में सदा दीपक जलता रहे।
वास्तु दोष
- पूजा कक्ष के ऊपर या नीचे शौचालय नहीं होना चाहिए।
- देव मूर्तियों का मुख दक्षिण में नहीं होना चाहिए।
- पूजा कक्ष में कभी जूते-चप्पल न रखें।
- बेकार, टूटी या अशुद्ध मूर्तियां न रखें।
उपाय
- पूजा कक्ष में स्फटिक श्रीयंत्र स्थापित करें।
- नित्य गंगाजल से पूजा स्थल शुद्ध करें।
- सोमवार को पूजा कक्ष में शिव पंचाक्षरी मंत्र का पाठ करें।
- पूजा कक्ष में तांबे का कलश रखें।
- नित्य धूप-दीप से पूजा करें।
दैनिक चेकलिस्ट
- पूजा कक्ष में प्रतिदिन सफाई करें।
- ताजे फूल चढ़ाएं।
- दीपक जलाएं।
- भगवान को भोग लगाएं।
- मंत्र पाठ या आरती करें।