वायव्य कोण वास्तु
शुभ दिशा: उत्तर-पश्चिम देव: वायु देव वायु तत्व
आज का सुझाव:
रसोई में मसाले उत्तर-पूर्व में और गैस चूल्हा दक्षिण-पूर्व में रखें।
अवधारणा
वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम) वायु तत्व और गति का प्रतीक है। यहाँ वायु देव का वास है। इस दिशा में मेहमान कक्ष, गैरेज, या भंडार कक्ष बनाना उचित है। यह दिशा परिवर्तन, यात्रा और सामाजिक संबंधों को प्रभावित करती है।
आदर्श व्यवस्था
- मेहमान कक्ष उत्तर-पश्चिम में रखें।
- गैरेज या वाहन पार्किंग यहाँ उत्तम है।
- वायु संचार के लिए यहाँ खिड़कियां रखें।
- इस कोण में सफेद या हल्के भूरे रंग का उपयोग करें।
- भंडार कक्ष या दालान यहाँ बनाएं।
वास्तु दोष
- वायव्य में पूजा कक्ष या मुखिया का कमरा नहीं होना चाहिए।
- यहाँ पानी का संग्रह हानिकारक है।
- वायव्य में भारी निर्माण नहीं होना चाहिए।
- यहाँ कूड़ादान रखना वर्जित है।
उपाय
- वायव्य दोष के लिए यहाँ चांदी का गोला रखें।
- सफेद रंग की मोमबत्ती जलाएं।
- यहाँ वायु शोधक (air purifier) रखें।
- वायु मंत्र का जाप करें।
- पवन-चक्की (wind chime) यहाँ लटकाएं।
दैनिक चेकलिस्ट
- कमरे में हवा आने-जाने की जांच करें।
- खिड़कियां खोलें।
- सफाई करें।
- भारी सामान हटाएं।
- Wind chime की स्थिति जांचें।