मुख्य द्वार वास्तु
शुभ दिशा: उत्तर / पूर्व देव: कुबेर / सूर्य पृथ्वी तत्व
आज का सुझाव:
रसोई में मसाले उत्तर-पूर्व में और गैस चूल्हा दक्षिण-पूर्व में रखें।
अवधारणा
वास्तु शास्त्र में मुख्य द्वार को "महाद्वार" कहा जाता है। यह घर की ऊर्जा का प्रवेश बिंदु है। वास्तु पुरुष मंडल के अनुसार उत्तर और पूर्व दिशा में स्थित द्वार देवताओं का आशीर्वाद लाते हैं। यहाँ से आने वाली सकारात्मक ऊर्जा पूरे घर को प्रभावित करती है।
आदर्श व्यवस्था
- मुख्य द्वार उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में होना चाहिए।
- द्वार की ऊँचाई चौड़ाई से डेढ़ गुना अधिक होनी चाहिए।
- दरवाजा अंदर की ओर खुलना चाहिए।
- प्रवेश द्वार पर मंगलकारी चिह्न — ॐ, स्वस्तिक — अंकित करें।
- दहलीज (threshold) पर नियमित रूप से रंगोली या पुष्प रखें।
वास्तु दोष
- दक्षिण-पश्चिम दिशा में मुख्य द्वार अत्यंत हानिकारक है।
- टूटा-फूटा या चरमराता दरवाजा नकारात्मकता का संकेत है।
- द्वार के सामने दीवार या खंभा हो तो ऊर्जा अवरुद्ध होती है।
- प्रवेश पर जूते-चप्पल का अस्त-व्यस्त ढेर दोष उत्पन्न करता है।
उपाय
- द्वार पर स्फटिक (crystal) का गणेश जी की मूर्ति रखें।
- सात घोड़ों का चित्र दक्षिण दिशा की दीवार पर लगाएं।
- प्रवेश के दोनों ओर पीले रंग के दीपक जलाएं।
- द्वार पर नमक की छोटी कटोरी रखें जो सप्ताह में एक बार बदलें।
- नौ इंच ऊँचा देहलीज/threshold रखें जो नकारात्मकता को रोके।
दैनिक चेकलिस्ट
- आज दरवाजा साफ करें और तेल लगाएं।
- स्वस्तिक या ॐ चिह्न पर हल्दी-कुमकुम लगाएं।
- जूते-चप्पल व्यवस्थित जगह पर रखें।
- प्रवेश पर दीपक जलाएं।
- ताजे फूल या रंगोली लगाएं।