रसोई वास्तु

शुभ दिशा: दक्षिण-पूर्व (अग्नेय कोण) देव: अग्नि देव अग्नि तत्व

आज का सुझाव: रसोई में मसाले उत्तर-पूर्व में और गैस चूल्हा दक्षिण-पूर्व में रखें।

अवधारणा

रसोई में अग्नि का वास होता है इसलिए इसे वास्तु पुरुष मंडल के अग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व) में बनाना शुभ है। यहाँ अग्नि देव का आधिपत्य होता है। सही स्थान पर बनी रसोई घर में स्वास्थ्य, समृद्धि और पारिवारिक सौहार्द लाती है।

आदर्श व्यवस्था

  • गैस चूल्हा दक्षिण-पूर्व दिशा में रखें।
  • खाना बनाते समय पूर्व की ओर मुख रखें।
  • पानी का नल (sink) उत्तर-पूर्व में रखें — अग्नि और जल को अलग रखें।
  • रसोई की दीवार का रंग पीला, नारंगी या लाल रखें।
  • रसोई में खिड़की दक्षिण या पूर्व दिशा में हो।

वास्तु दोष

  • उत्तर-पूर्व कोण में रसोई बनाना अत्यंत दोषपूर्ण है।
  • गैस और पानी को एक-दूसरे के सामने रखना टकराव उत्पन्न करता है।
  • रसोई के ऊपर या नीचे शौचालय होना अशुभ है।
  • दक्षिण-पश्चिम में रसोई बनाना स्वास्थ्य समस्याएं देता है।

उपाय

  • यदि रसोई गलत दिशा में है तो दक्षिण-पूर्व कोने में लाल रंग का बल्ब जलाएं।
  • रसोई में नौ नींबू की माला लटकाएं।
  • चूल्हे के पास स्फटिक का एक टुकड़ा रखें।
  • रसोई में मोर पंख रखें।
  • प्रतिदिन रसोई साफ रखें और रात को चूल्हा ढककर रखें।

दैनिक चेकलिस्ट

  • रसोई की दैनिक सफाई करें।
  • रात को गैस बंद और ढकी हुई रखें।
  • बचा हुआ खाना बाईं ओर रखें, दाईं ओर ताजा खाना।
  • रसोई में झाड़ू-पोछा लगाएं।
  • अनावश्यक बर्तन व सामान हटाएं।