शयनकक्ष वास्तु
शुभ दिशा: दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य) देव: नैऋति पृथ्वी तत्व
आज का सुझाव:
रसोई में मसाले उत्तर-पूर्व में और गैस चूल्हा दक्षिण-पूर्व में रखें।
अवधारणा
शयनकक्ष हमारी विश्राम और पुनर्ऊर्जा का स्थान है। वास्तु शास्त्र के अनुसार मुखिया का शयनकक्ष दक्षिण-पश्चिम में होना चाहिए क्योंकि यह स्थिरता, शांति और अधिकार का कोण है। यहाँ की ऊर्जा गहरी नींद और पारिवारिक संबंधों को पोषित करती है।
आदर्श व्यवस्था
- सिर दक्षिण या पूर्व की ओर करके सोएं।
- पलंग दक्षिण-पश्चिम की दीवार के पास रखें।
- शयनकक्ष का रंग हल्का नीला, हरा या क्रीम रखें।
- दर्पण पलंग के सामने न लगाएं।
- शयनकक्ष में भारी फर्नीचर दक्षिण-पश्चिम में रखें।
वास्तु दोष
- उत्तर दिशा में सिर करके सोना मानसिक अशांति देता है।
- शयनकक्ष में मंदिर या पूजा स्थान नहीं होना चाहिए।
- टूटे दर्पण या बंद घड़ी शयनकक्ष में दोष है।
- शयनकक्ष में जल तत्व (एक्वेरियम) नहीं रखना चाहिए।
उपाय
- दक्षिण दिशा की दीवार पर युगल पक्षियों का चित्र लगाएं।
- शयनकक्ष में लैवेंडर या चंदन की अगरबत्ती जलाएं।
- पलंग के नीचे शुद्ध नमक की एक कटोरी रखें।
- शयनकक्ष में रोज रात सफाई करें और सकारात्मक विचार रखें।
- बाईं ओर गुलाबी या लाल रंग के फूल रखें।
दैनिक चेकलिस्ट
- बिस्तर की चादर साफ और सुगंधित रखें।
- पलंग के नीचे का स्थान साफ करें।
- सोने से पहले मोबाइल और टीवी बंद करें।
- नकारात्मक विचार छोड़कर सोएं।
- दर्पण ढककर सोएं।